रिश्तेदार को जलाने वाली शायरी | 100+ तगड़ी और दमदार शायरी

रिश्तेदार को जलाने वाली शायरी – हमारे जीवन में अक्सर कुछ ऐसे रिश्तेदार होते हैं जो हमारी खुशी या तरक्की देखकर खुश होने के बजाय मन ही मन जलने लगते हैं। ऐसे लोग सामने तो बहुत अपनेपन का दिखावा करते हैं, लेकिन पीठ पीछे आपकी बुराई करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने यह खास Rishtedar Ko Jalane Wali Shayari का कलेक्शन तैयार किया है। इस पोस्ट में आपको ऐसे दमदार और एटीट्यूड वाले शेर-ओ-शायरी मिलेंगे जिन्हें पढ़कर जलने वालों को उनकी असलियत का अहसास हो जाएगा।

रिश्तेदार को जलाने वाली शायरी

नफरत की आग में वो खुद को जला रहे हैं,
अपने होकर भी दुश्मन का फर्ज निभा रहे हैं।

रिश्तेदार-को-जलाने-वाली-शायरी (1)

हमें दुश्मनों की चालसाजी से डर नहीं लगता है,
हम तो अपनों की चालें देखकर मुस्कुराना आता हैं।

रिश्तों की आड़ में सियासत खूब की तुमने,
पर याद रखना, ये आग तुम्हारे घर तक भी आएगी।

मेरी औकात देखनी है तो आसमान देख,
नीचे देखोगे तो सिर्फ मेरी धूल ही दिखेगी।

शोर मत करो मेरे खिलाफ, बस तमाशा देखते जाओ,
मैं ऊंचाइयां छूता रहूँगा, तुम बस खुद को जलाते जाओ।

हमें आईने में खुद को देखकर सुकून मिलता है,
क्योंकि ये चेहरा दूसरों की तरह बदलता तो नहीं।

जो मुझे गिराने की साजिशों में मशगूल थे,
आज मेरी तरक्की देख कर धूल चाट रहे हैं।

आग लगाने वालों को ये खबर होनी चाहिए,
कि रुख हवाओं का बदला, तो खाक वो भी होंगे।

वैसे तो सांपों को पालने का हम कोई शौक नहीं रखते है,
पर कुछ रिश्तेदार आस्तीन के सांप से कम भी नहीं होते हैं।

हम अपनी मस्ती में खोए हैं, उन्हें लगता है हम सोए हैं,
हमारी कामयाबी देखकर, वो कई रातों से रोए हैं।

दुनिया कहती है जलने वाले जलते रहेंगे,
मैं कहता हूँ, हम भी उन्हें यूँ ही जलाते रहेंगे।

जलने वालों की तादाद बढ़ रही है, लगता है हमारा नाम हो रहा है,
रिश्तेदारों की महफिल में, अब हमारा ही जिक्र सरेआम हो रहा है।

2 लाइन रिश्तेदार को जलाने वाली शायरी हिंदी में

हम रिश्तेदारों के बीच इसीलिए कदम नहीं रखते हैं,
क्योंकि हमें देखकर कई अपनों के चेहरे उतर जाते हैं।

रिश्तेदार-को-जलाने-वाली-शायरी (2)

शरीफ हम तब तक हैं, जब तक कोई छेड़े नहीं,
और जब बिगड़ गए, तो फिर कोई छोड़े नहीं।

मेरी तरक्की पर जो जलते हैं, उन्हें जलने दो,
उनकी फितरत ही यही है, उन्हें इसी आग में पलने दो।

लोग कहते है मेरी औकात से बड़े मेरे सपने हैं,
शायद इसीलिए खफा मेरे आधे से ज्यादा अपने हैं।

नफरत पालने के लिए भी कलेजा चाहिए,
तुम जैसे डरपोक तो बस पीठ पीछे जल सकते हो।

खुदा ने मुझे जो दिया, वो मेरी मेहनत का सिला है,
अब इसमें मेरी क्या खता, अगर किसी का दिल जला है?

पीठ पीछे जो मेरी बुराई करते हैं, उनके लिए बस एक पैगाम है,
तुम जलते रहो राख होने तक, मेरा तो अभी बस आगाज़ है।

सिक्के शोर मचाते हैं, पर नोट खामोश रहते हैं,
मेरी चुप्पी ही बता रही है कि मेरी हैसियत क्या है।

जिसे जो कहना है कहने दो, अपना क्या जाता है,
ये वक्त-वक्त की बात है, और वक्त सबका आता है।

हम अपनी लकीर बड़ी करने में मसरूफ थे,
वो हमारी लकीर मिटाने में अपनी उम्र गुज़ार बैठे।

जलने वाले रिश्तेदारों को मैं और जलाता हूँ,
अभे उन्हें उनकी असली औकात दिखाता हूँ।

अपनों की हंसी भी हमें दिखावे की नज़र आती है,
क्योंकि उनकी हंसी के पीछे जलन की बू आती है।

वफ़ा की उम्मीद गैरों से क्या रखना, यहाँ तो अपने भी खंजर रखते हैं,
सामने से तो मुस्कुराकर मिलते हैं, पर चुपके से पीठ पीछे वार करते है।

Conclusion

अगर आप भी अपने विरोधियों और मतलबी रिश्तेदारों को बिना कुछ कहे अपनी बातों से करारा जवाब देना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है। इस पोस्ट को पढ़ने के बाद हमें उम्मीद है कि आपको अपने मन की बात कहने के लिए सही शब्द मिल गए होंगे।

अगर आपको रिश्तेदार को जलाने वाली शायरी का हमारा यह कलेक्शन पसंद आया हो तो इसे सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें और आपसे जलने वालों को एक शानदार जवाब दें। इन शायरियों का मकसद किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि उन लोगों को आईना दिखाना है जो आपसे जलते है और आपके लिए मुश्किलें खड़ी करते हैं।

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